रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६८ असली कोकशास्त्र
प्रसव होने के दो-तीन घण्टे बाद प्रसूता को कुछ खिलाकर
सुला देना उचित है। इस समय किसी प्रकार का हल्ला-गुल्ला करना
प्रसूता के लिए दुःखदायी होता है। हमारे यहाँ लड़का पैदा होने
पर बन्दूकों की आवाजें की जाती हैं, स्त्रियाँ गाना-बजाना करती हैं;
किन्तु उस समय यह सब करना अच्छा नहीं। इन कामों से प्रसूता
की बेचैनी बढ़ जाती है। इस समय ऐसी शान्ति रखनी चाहिए,
जिससे प्रसूता को फौरन नींद आ जाय। जब वह सोकर उठे, तब
उसे पेशाब कराना चाहिए; किन्तु उसे उठाकर पेशाब न करावे, लेटे
ही लेटे, क्योंकि हिलने-डोलने से प्रसूता को बड़ा ही कष्ट होता है।
उठने-बैठने या हिलने-डोलने से रक्त-स्राव होने लगता है। पारसियों
के घरों की स्त्रियाँ प्रसव होने के चालीस दिन बाद बाहर निकलती
हैं। इतना नहीं तो कम-से-कम १५-२० दिन तक तो अवश्य ही
नियम का पालन करना प्रत्येक प्रसूता का कर्त्तव्य होना चाहिए।
इस समय गर्भाशय सिकुड़ कर इतना छोटा नहीं होगया रहता कि
वह उदर-गह्वर में जा सके। वह कहीं १५-१६ दिन में उदर-गह्वर
में जाने के योग्य होता है। इस लिए इतने दिनों तक विशेष
सावधानी की जरूरत रहती है। यही कारण है कि लेटे ही लेटे
पेशाब करने का आदेश किया गया है।
यदि मूत्र न उतरे तो गरम पानी में साफ कपड़ा भिगोकर उसे
निचोड़ डाले और उसे पेडू पर रक्खे। थोड़ी देर तक ऐसा करने
से पेशाब हो जायगा। किन्तु यदि इससे भी पेशाब न हो तो किसी