रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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बाहर निकल आती है। यदि प्रसव के बाद एक घण्टा बीत जाय
और वह थैली बाहर न निकले, तब उसे बाहर निकालने का यत्न
करना आवश्यक है ।
दाई को प्रसूता के पेट पर हाथ फेरते रहना चाहिए । ऐसा
करने से पेट में पीड़ा होने लगती है और वह थैली बाहर निकल
आती है। ऐसा करने पर भी यदि वह न गिरे तो नीचे लिखे
आयुर्वेदशास्त्र के यत्नों को करना चाहिए ।
१—भोजपत्र और गुग्गल को कूटकर प्रसूता की कमर में
उसका धुआँ देना चाहिए ।
२—लाँगली की जड़ को पानी में पीसकर प्रसूता के हाथ-पैर
में लेप करने से वह थैली शीघ्र गिर पड़ती है ।
यदि इस तरह भी वह बाहर न निकले तो खुद दाई को चाहिए
कि वह अपने हाथ में नारियल का तेल पोतकर खूब सावधानी से
उसे इकट्ठा करके निकाले और एक हाथ से प्रसूता के पेट को
दबाये रहे। यदि पेट दबाया नहीं जायगा तो खून बहुत निकलेगा
और प्रसूता बिलकुल कमजोर हो जायगी। इस लिए इस बात की
ओर पूरा ध्यान रखना चाहिए। इसका थोड़ा अंश भी पेट में रह
जाने से प्रसूता का स्वास्थ्य आजन्म के लिए नष्ट हो जाता है, उसे
विषैला ज्वर आने लगता है ।
जब यह बाहर निकल आवे तब एक दुपट्टा चौपर्त कर पेडू से
कलेजे तक कस कर लपेट देना चाहिए। इससे खून का गिरना बन्द