रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २६५
तेल रह जाय, तब उसे उतार कर कपड़े से छान डाले और शीशा
में रख दे यही कठ-तेल कहलाता है। यदि कठ तेल न हो तो तिल
का तेल ही लगा देना चाहिए। इसके लगाने से भी पकने का भय
बहुत कम रहता है।
बालक के लिये गाय के दूध से बढ़कर गुणकारी दूसरा दूध
नहीं है। अगर है तो केवल माता का दूध। किन्तु माता का दूध
तो अमृत तुल्य है अतः उसे दूध की श्रेणी में रखना ठीक नहीं। गाय
का दूध हलका, पुष्ट, निरोग और फुर्तीला होता है, इस लिए बालक
को सदा गाय का दूध ही पिलाना चाहिए।
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प्रसूता के लिए उपचार
बालक उत्पन्न होने के बाद स्त्री के पेट से एक मांस की सी
थैली निकलती है जिसको विभिन्न प्रान्तों में 'आँवल' 'औनार'
'खेढ़ी' आदि नामों से सम्बोधित किया जाता है। जैसे गाय-भैंस
के बच्चा पैदा होने के बाद खेढ़ी गिरती है उसी प्रकार स्त्री के भी।
इसका न निकलना बड़ा ही हानिकारक है। जब तक यह न गिरे,
तबतक स्त्री के पेट पर से हाथ नहीं हटाना चाहिए। यदि यह अपने
से न गिरे तो खींचकर कभी भी निकालने की चेष्टा नहीं करनी
चाहिये। क्योंकि खींचकर निकालने से गर्भाशय को बड़ी हानि
पहुँचती है। प्रसव होने के आधा घण्टा बाद यह थैली अपने-आप ही