रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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चाहिए, बालक का पेट साफ करने के लिए उसकी माता का दूध
सबसे अधिक गुणकारी है। अतः पहले माता का दूध ही पिलाना
चाहिए। यदि माता के स्तनों में दूध न उतरा हो तो रेंडी का तेल
और मधु मिलाकर चटाना चाहिए।
यदि नाल से रुधिर निकलता हो तो उसे रेशम से बाँध देना
चाहिए। नाल से रुधिर का निकलना बहुत ही हानिकर है। आठ
नौ दिन में नाल अपने से सूखकर गिर जाता है। यदि वह आप ही
न गिरे तो उसे भूलकर भी खींचना नहीं चाहिए। यदि बालक की
खाल कहीं सिकुड़ी हुई हो और उसके पास कुछ मैल या छिला
हुआ अथवा कटा हुआ दिखलायी पड़े तो उसको नरम कपड़े या
स्पञ्ज से धो दिया करे तथा चिकनी खड़िया और चावल का आटा
या मैदा मिलाकर उस पर लगा दिया करे।
कभी-कभी बच्चों का नाल पक भी जाता है। इस लिए चतुर
दाई का कर्त्तव्य है कि वह ऐसे ढंग से सब काम करे कि उसके
पकने की नौबत ही न आये। यदि किसी कारणवश पक ही जाय
तो उस पर सफेदा या कलई लगा देना चाहिए। यदि नाल सूज
आया तो तो अफीम को तेल में घिसकर लगाने से अच्छा हो जाता
है। नाल काटने के बाद तुरन्त ही यदि कठ का तेल लगा दे तो
उसके पकने या सूजने का भय नहीं रहता। कठ तेल इस प्रकार
बनता है कि तेल और पानी को बराबर बराबर लेकर उसमें काठ
का चूर्ण डाल आग पर पकावे। जब सब पानी जल जाय और सिर्फ