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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 275, कुल 440 में से

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पृष्ठ 275

जाय, पश्चात् एक मोती नित्य-प्रति बच्चे को खिलाया जाय तो
आमरणपर्यन्त उसे चेचक रोग नहीं हो सकता ।
बच्चे को स्नान कराने के लिए जो पानी गरम किया जाय,
उसमें यदि पीपल, गूलर या बटवृक्ष की छाल डाल दी जाय तो
बड़ा लाभ होता है। यदि उक्त वृक्षों की छाल समय पर न मिल
सकें तो तपाई हुई चाँदी या सोने को पानी में बुझाकर उसी जल
से बच्चे को नहलाना उचित है। बच्चे को प्रतिदिन कुनकुने पानी
में जरा सा नमक मिलाकर स्नान कराने से बड़ा फायदा पहुँचता है।
बालक को पैदा होने के बाद दस्त होता है। इस दस्त का
होना बहुत जरूरी है यह दस्त जितना शीघ्र हो जाय उतना ही
अच्छा। इसके होने से बच्चे का पेट साफ हो जाता है और भूख
खूब ठिकाने से लगती है। यह मल गर्भ में बहुत दिनों का जुटने के
कारण बड़ा हानिकारक होता है। यदि दस्त न हो तो शुद्ध किया
हुआ दस बूँद रेंडी का तेल शहद में मिलाकर या योंही पिला देना
उचित है। इससे अवश्य दस्त उतर आता है और बच्चे को
आराम मिलता है। जब तक यह पहला दस्त नहीं हो जाता, तब
तक बच्चा बड़ा ही बेचैन रहता है, इसके होते ही उसे फुरसत मिल
जाती है। यदि यह मल बच्चे के पेट में दो-चार दिन रह जाता
है अर्थात् दो-चार दिन तक बच्चे को दस्त नहीं होता, तो वह
बालक रोगी हो जाता है और पेट की बीमारियाँ तो उसे बहुधा
हुआ करती हैं। इस लिए इसमें जरा भी ढिलाई नहीं करनी