रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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परन्तु बच्चे के शरीर में ज्यों-त्यों हवा लगती है, त्यों-त्यों उसकी
हड्डियाँ कड़ी होती जाती हैं।
कभी-कभी बच्चा उत्पन्न होने पर चुपचाप पड़ा रहता है, उस
का कोई भी अङ्ग नहीं हिलता-डोलता। ऐसी दशा में बच्चे को
होशियारी से उल्टा अर्थात् सिर नीचे और पैर ऊपर करके १०-
१५ सिकेंड तक रखना चाहिए और उसकी छाती को धीरे-धीरे
दबाकर फेफड़ों में चैतन्यता लानी चाहिए। इस समय बच्चे के
मुँह में अँगुली डालकर बलगम वगैरह निकाल लेना उचित है।
कारण यह कि उल्टा करने से बच्चे के गले का बलगम मुख में
आ जाता है।
नाल काटने के बाद बच्चे को करवट के बल लिटा देना चाहिए
और उसे स्नान कराने का प्रबन्ध करना चाहिए। इस समय
बालक के समूचे शरीर में यदि शहद पोत दी जाय तो बहुत ही
उत्तम हो। शहद लगाने से बच्चा सदा के लिए रोगमुक्त हो जाता
है। कुछ देर के बाद शहद को कोमल तथा साफ कपड़े से पोंछ-
कर बालक को नहला देना चाहिए। तीन अँगुली बचे हुए नाल को
भी पानी में उबाले हुए मलमल के टुकड़े से लपेट देना चाहिए।
बच्चे को नहलाते समय उसके नाल पर मैला पानी जरा भी न पड़ने
दे। क्योंकि उसके भींजने से पक जाने या सड़ जाने का भय रहता
है। नाल काटते समय यदि रुधिर को पीछे हटाकर १२ अनबिंधे
मोती उसमें भर दिये जायँ और ऊपर से बाँधकर नाल को काटा