रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २६१
ठण्डा करके काम में लाना उचित है। ऐसा करने से लोहे के
औजार में कोई विकार नहीं रह जाता और नाल जल्द सूख जाता
है। नाल काटने के बाद बच्चे के शरीर में बेसन लगाकर उसे
किंचित गरम जल से नहला देना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे के
शरीर की मैल छूट जाती है। बालक के उत्पन्न होते ही चतुर दाई
को यह देख लेना चाहिए कि उसका अङ्ग-प्रत्यङ्ग सब ठीक है या
कोई अङ्ग विकृत अथवा जुड़ा हुआ है। क्योंकि बहुत से बच्चों
की हाथ-पैर की अँगुलियाँ एक ही में जुड़ी हुई होती हैं। इसलिए
यदि ऐसा हो तो फौरन तेज छुरे से उसे अलग कर देना चाहिए।
ऐसा न करने से अँगुलियाँ जुड़ी हुई ही रह जाती हैं। इसी प्रकार
यदि आँखों की पलकें बन्द हों यानी जुड़ी हुई हों तो उन्हें भी
नश्तर देकर ठीक कर देना चाहिए। यदि गुदा का छिद्र बन्द हो तो
उसे भी खोल देना चाहिए। आजकल बहुत सी दाइयाँ काँच की
चूड़ी को तोड़कर उसकी नोक से चीर देती हैं; परन्तु यह बहुत
ही वाहियात काम है। इससे बहुत भय और हानि है यह काम
तेज छुरे से ही होना उचित है। इसी प्रकार यदि कोई अङ्ग बेडौल
हो तो उसे तुरन्त ठीक कर देना चाहिए। जैसे,यदि नाक चिपटी
हो तो उसे दुहकर ऊपर को उठा देनी चाहिए; यदि मस्तक टेढ़ा
हो तो उसे दोनों हाथों से दाब कर सुडौल कर देना चाहिए। इस
समय थोड़ी ही सावधानी और उपाय से बेडौल अङ्ग सुडौल हो
सकता है; क्योंकि शरीर की हड्डियाँ बहुत ही कोमल रहती हैं।