रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६० असली कोकशास्त्र
वह किसी भी रूप में उसके शरीर में प्रवेश कराया जाय । सबसे
अच्छा तरीका वही ऊपर वाला नाल को दुहकर बच्चे के शरीर में
रक्त पहुँचाना है। नाल काटने से पहले उसे शहद, घी और सेंधा
नमक से शुद्ध कर लेना बहुत ही उत्तम है। या सोने अथवा चाँदी
के बुझे हुए जल से नाल को शुद्ध करके तब काटे ।
नालोच्छेदन करने के बाद पहले से पीसकर रक्खी हुई एक
माशे लकड़ी के कोयले में दो चावल कस्तूरी की बुकनी मिलाकर
उस पर लगा देनी चाहिए। ऐसा करने से बच्चे को मसान का रोग
नहीं होता । पश्चात् घी, शहद, अनन्तमूल और ब्राह्मी के रस में
थोड़ा सा सोने का चूर्ण मिलाकर चटा दे; यह बहुत ही गुणदायक
है । इससे एक तो बालक का मल गिर जाता है और दूसरे बच्चे
की तन्दुरुस्ती पर बड़ा अच्छा प्रभाव पड़ता है, यदि ये चीजें न
मिल सकें, तो बच्चे को शहद और घी चटाना चाहिए ।
यदि बालक सतमासा या गर्भ पूरा होने के कुछ पहले ही पैदा
हो जाय और वह निर्बल अधिक हो तो उसके लिए एक यत्न और
करना चाहिए। यह कि धुनी हुई रुई कड़वे तेल में भिगोकर उस
में दो या चार दिन तक बच्चे को रक्खे। इससे बच्चे का उतना
ही पोषण होता है, जितना कि माता के पेट में । ऐसा करने से
सतमासे बच्चे भी बहुत से जी जाते हैं ।
जिस छुरी या कैंची से नालोच्छेदन करना हो, उसे पहले खूब
खौलते हुए पानी में डालकर गरम कर लेना चाहिए । बाद उसको