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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 270, कुल 440 में से

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२५८ असली कोकशास्त्र
हाँफता हो तो पहले उसके मुख में सावधानी से अँगुली डालकर
लार निकाल डाले। बाद ठण्डे पानी में अपना हाथ डुबाकर बच्चे
की छाती पर बहुत धीरे से हथोसना चाहिए। थोड़ा हथोसने पर
ही बालक रोने लगेगा। यदि इससे भी बालक न रोवे तो थोड़े से
ठण्डे जल का हलका छींटा उसके मुख पर देना चाहिए अथवा
बालक की पीठ पर हल्की थपकियाँ लगाकर रुलाना चाहिए। यदि
इतने पर भी बालक न रोवे तो उसे गोद में चित लिटा ले और
उसके दोनों हाथ पकड़ कर जरा ऊपर उठावे और उसके मुख में
दो चार फूँक लगावे, किन्तु फूँक लगानेवाली स्त्री का मुख बदबूदार
न हो, नहीं तो बच्चे के बीमार हो जाने का भय रहेगा। बहुत-सी
स्त्रियाँ बच्चे को रुलाने के लिए ठण्डे पानी में उसका सिर डुबा
देती हैं, पर यह काम अच्छा नहीं है।
यदि बालक होकर नीला पड़ जाय; तो उसकी नाभि से तीन
अंगुल छोड़कर नाल को काट दे। जब पैसे भर के अन्दाज खून
गिर जाय, तब उसे फौरन बाँध दे; बहुत खून न गिरने पावे। ऐसा
करने से मुख, आँख का नीलापन दूर हो जाता है। कितनी ही
दाइयाँ बच्चे को रुलाने के लिए काली मिर्च चबाकर उसके मुख
में फूँकती हैं, किन्तु इससे बच्चे की बहुत हानि होती है।
इस प्रकार पहले बच्चे को रुलाकर तब उसका नाल काटना
चाहिए। नाल काटने की रीति यह है:—नाल को नाभि से तीन
अंगुल छोड़कर बाँध दे। फिर उस बँधन से आधा अंगुल छोड़कर