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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 268, कुल 440 में से

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पृष्ठ 268

२५६ असली कोकशास्त्र
साधारणतयः जिस प्रकार प्रसव होता है और प्रसवकाल में
जिन बातों का जानना आवश्यक है, उनका वर्णन यहाँ तक किया
जा चुका; किन्तु कभी-कभी ऐसी विकट समस्या उपस्थित हो
जाती है कि बालक और प्रसूता दोनों की जान जाने का भय
रहता है। जैसे, पहले सिर न निकल कर बच्चे का नितम्ब बाहर
निकल आता है। यह भयंकरता का चिह्न है। इस समय चतुर
दाई ही काम कर सकती है। कभी-कभी बच्चा अधिक मोटा होने
अथवा मर जाने के कारण बाहर नहीं निकलता। बच्चे का गर्भ
में मर जाना बड़ा ही भयंकर है। ऐसी दशा में फौरन डाक्टर को
बुलाना चाहिए। कभी-कभी आँवल पहले ही निकल आती है। यह
भी भयंकर बात है। इसको बच्चा पैदा होने के बाद निकलना
चाहिए; किन्तु कभी-कभी यह गर्भाशय के मुख के पास लग जाती
है। इसी से पहले यही निकल पड़ती है। जब रज पाँचवें अथवा
छठे महीने में प्रवाहित हो, तब समझना चाहिए कि आँवल गर्भा-
शय के पास ही है। आँवल गर्भाशय के मुख के पास है या नहीं,
यह जानने के लिए छठे महीने जब रुधिर बहे और इसी तरह बिना
किसी कारण के कभी-कभी बहने लगे, तब अंगुली डालकर यह
देखना चाहिए कि कोई मुलायम चमड़े की तरह चीज तो नहीं है।
यदि ऐसी चीज का अँगुली से स्पर्श हो, तो समझ लेना चाहिए
आँवल गर्भाशय के मुख के पास ही है। इसका निश्चय हो जाने
पर प्रसव के समय दाई को खूब सावधानी से काम करना चाहिए।