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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 267, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र २५५
दूध पिलाना भी फायदेमन्द है ।
१६—साँप की केंचुर की धूनी गुह्य-स्थान में देने से भी प्रसव
होने में बड़ी सहायता मिलती है ।
१७—छींक आने के लिए कोई दवा देने से भी बच्चा शीघ्र
बाहर निकल आता है ।
१८—पाँच तोले गुड़ में एक तोला अजवाइन का काढ़ा बना-
कर कुनकुना पिलाने से भी प्रसव हो जाता है ।
१९—रेंडी की गिरी, पीपल और बच को तिल्ली के तेल में
पीसकर नाभि के ऊपर लेप करने से कितना ही कष्ट क्यों न हो,
फौरन दूर हो जाता है और सुख से सन्तान पैदा होती है ।
२०—मोरशिखा की जड़, विजयसार, सहिजन की जड़, पान,
कटाली और खरेंटी इन चीजों को बराबर-बराबर लेकर काँजी के
जल में पीस, नाभि में लेप करने से शीघ्र प्रसव हो जाता है । या
शालपर्णी की जड़ को चावल के पानी में पीसकर नाभि, भग और
वस्ति में लेप करने से सुख से बालक उत्पन्न हो जाता है ।
२१—चिरमिटी की जड़ को दस टुकड़े कर डाले । बाद सात
तार के लाल धागे में उनको अलग-अलग बाँधकर कष्टवाली स्त्री की
कमर में बाँध देने से सन्तान तत्क्षण उत्पन्न हो जाती है ।
२२—गाजर के बीज, सौंफ, सोया, मेथी के दाने, वटवृक्ष की
जड़, बनपशा और मुलहठी प्रत्येक तीन तीन माशे लेकर क्वाथ
बनावे। छानकर गर्भिणी को पिलाने से सुख से प्रसव हो जाता है ।