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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 266, कुल 440 में से

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२५४ असली कोकशास्त्र
७—फालसे की जड़ अथवा शालपर्णी की जड़ को पानी में
पीसकर नाभि, वस्ति और योनि पर लेप करने से भी लाभ होता है।
८—अपामार्ग (इसे ग्रामीण भाषा में चिरचिटा या चिचड़ी
कहते हैं) की जड़ महीन पीसकर नाभि के नीचे योनि और जंघों
पर लेप कर देने से भी प्रसव सुखपूर्वक हो जाता है।
९—अपामार्ग बड़ी ही तीक्ष्ण वस्तु है। यदि बहुत आवश्यकता
आ पड़े और बालक किसी तरह भी बाहर न निकलता हो, तब
इसकी जड़ (ताजी) जिसकी लम्बाई तीन-चार अँगुल हो, बड़ी
सावधानी से प्रसूता की योनि में रख दे। साधारण दशा में इसका
प्रयोग कभी नहीं करना चाहिए, नहीं तो गर्भाशय तक बाहर
निकल पड़ेगा।
१०—मनुष्य के बाल जलाकर गुलाबजल में मिला दे, बाद
उसे स्त्री के तलवे पर मलने से भी जल्द प्रसव हो जाता है।
११—प्रसूता अपने लट को मुख में डाल ले। इससे भी शीघ्र
प्रसव हो जाता है।
१२—'अपीका' नामक अंग्रेजी दवा एक-एक रत्ती तीन बार
देने से सहज ही में प्रसव हो जाता है।
१३—बच को उबाल कर पीने से भी बहुत ही लाभ होता है।
१४—गर्भिणी के शरीर में अच्छी तरह से तेल लगाकर गरम
जल से स्नान कराना भी हितकर है।
१५—थोड़ी सी मूँग की खिचड़ी गरम-गरम खिलाना या गरम