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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 265, कुल 440 में से

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पृष्ठ 265

असली कोकशास्त्र २५३
किसी-किसी स्त्री को बालक पैदा होते समय बड़ा कष्ट होता
है, जल्द प्रसव होता ही नहीं। कई दिनों तक असह्य वेदना होती
रहती है। ऐसी दशा में नीचे लिखे यत्नों से काम लेना चाहिए ।
किन्तु यत्न करने के पहले इस बात को अच्छी तरह से जान लेना
चाहिए कि प्रसव-वेदना ही है या और कुछ । जब यह निश्चय हो
जाय कि प्रसव-वेदना ही है, तब नीचे लिखे उपायों को काम में
लाकर गर्भिणी के कष्टों को दूर करना चाहिए:—
प्रासविक उपचार
१—करंजुवा के पत्तों और बीजों का कल्क बनाकर या बकरी
के दूध में तिल के तेल को पकाकर प्रसव-स्थान में मलने से बच्चा
पैदा हो जाता है, विशेष कष्ट नहीं होता ।
२—भैंड़भाँड़ की जड़ कपड़े में लपेट कर प्रसविरणी की कमर
में बाँधे, यह दवा परीक्षित है, शर्तिया प्रसव हो जाता है ।
३—रेंड़ी का तेल पेडू पर धीरे-धीरे मलने से बहुत जल्द
प्रसव हो जाता है ।
४—सेहुँड़ का दूध नख और ढूँड़ी पर मले ।
५—सवा तोला अमलतास का छिलका पानी में औटाकर
ऊपर से चीनी मिलाकर पिला देने से भी प्रसव जल्द हो जाता है ।
६—यदि चुम्बक पत्थर को प्रसूता अपने हाथ में लिये रहे,
तब भी प्रसव जल्द हो जाता है ।