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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 263, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 263

असली कोकशास्त्र — पृष्ठ २५१

अधिक नहीं। किन्तु मूर्ख दाइयाँ पहली अवस्था में जोर लगवा
लगवा कर प्रसूता को थका डालती हैं, जिससे बहुत हानि होती है।
पहली अवस्था में सिर्फ टहलाने के और कोई काम नहीं लेना
चाहिए। टहलाने से वेदना तीव्र हो जाती है, जिससे प्रसव होने
में शीघ्रता होती है। यदि वेदना मन्द पड़ जाय तो स्त्री को थोड़ा
सा गरम दूध पिलाना चाहिए। इससे जरायु का मुख शीघ्र खुल
जाता है। कोई-कोई स्त्री को दो चार दिन तक प्रसव-वेदना सहनी
पड़ती है। उस समय घर की स्त्रियाँ उसे भोजन नहीं देतीं; किन्तु
ऐसा करना उचित नहीं। गरम दूध या साबूदाना अथवा मखाने
की खीर आदि हल्की चीजें अवश्य खाने को देनी चाहिए।
प्रसव होते समय एक चतुर स्त्री को प्रसविणी के पीछे बैठ
जाना चाहिए। उसे अपना हाथ प्रसूता की पीठ पर धीरे-धीरे फेरना
चाहिए। जिस स्त्री को पहलौठी का बालक होता हो, उसकी तो
बड़ी ही सावधानी होनी चाहिए। इससे जननी को शान्ति मिलती
है। जबतक बच्चा पैदा न हो जाय, तबतक उस स्त्री के पीछे से नहीं
हटना चाहिए और हलका हाथ भी फेरते जाना उचित है। जब
बालक का सिर बाहर निकल आवे तब उसकी गर्दन के चारो ओर
हाथ फेरकर यह देख लेना जरूरी है कि नाल गर्दन में तो नहीं
लिपटा है। पैदा होते ही यदि यह नाल शरीर से न निकाला जाय
तो बच्चे के मर जाने का भय रहता है। बालक का मस्तक निकल
आने पर बहुत सी मूर्ख दाइयाँ बच्चे का मस्तक पकड़ कर खींचती