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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 26, कुल 440 में से

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पृष्ठ 26

असली कोकशास्त्र २५
अन्दर की नलियों, नसों द्वारा सदा फिरा करता है। खून की गति के
कारण ही हमारी नाड़ी एक मिनट में लगभग ७२ बार चलती
उछलती है। बच्चों की नाड़ी तेज चलती है बूढ़ों की सुस्त।
खून की सफाई का सबसे बड़ा साधन हवा है। शरीर में
चक्कर लगाकर जो खून फेफड़ों में जाता है वह निकम्मा हो जाता
है, उसमें जहरीले पदार्थ पैदा हो जाते हैं। जो हवा भीतर जाती है
वह उन जहरीले पदार्थों को खींच लेती है और अपने में मिली हुई
प्राणवायु खून को दे देती है। यह क्रिया सदा होती रहती है।
भीतर गई हुई हवा खून के जहरीले पदार्थ लेकर बाहर निकल
आती है और प्राणवायु खून में मिलाकर नसों के द्वारा सारे शरीर में
चक्कर लगाया करती है। इससे समझा जा सकता है कि बाहर
निकली हुई साँस कितनी जहरीली होती है। हवा का प्रभाव हमारे
शरीर पर अधिक रहता है।
सामान्यतः मनुष्य उन मनुष्यों को आरोग्य समझते हैं जो
खाते-पीते चलते-फिरते और वैद्यों को घर पर नहीं बुलाते। किन्तु
विचार करने पर मालूम होता है कि यह उनकी भूल है। ऐसे उदा-
हरणों की कमी नहीं है, जो खाने-पीने आदि के सभी व्यापार करते
हुए भी रोगी हैं, किन्तु अपने को रोगी नहीं समझते और साथ
ही रोग की परवाह भी नहीं करते। निरोग मनुष्य संसार में बहुत
ही कम हैं।
एक विदेशी लेखक का कहना है कि निरोग मनुष्य वे ही