रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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दे। सौर में सर्दी लगने से मसान आदि रोग हो जाते हैं। घर में
दीपक ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जो जच्चा के सम्मुख न हो।
सिरहाने की ओर रखना सबसे उत्तम है। अच्छा हो यदि उस घर
में मिट्टी के तेल का दीपक न जलाया जाय। कारण यह कि इस
तेल में धुआँ होता है और वह धुआँ जीवन के लिए हानिकारक है।
सौर के घर में बहुत-सी स्त्रियाँ न रहने पावें। स्त्री के पति
को तो उस समय वहाँ रहना ही नहीं चाहिए। घर में ऐसी स्त्रियाँ
उस समय रहें जो प्रसूता की प्रेमपात्री हों और प्रिय वचन बोलने
वाली हों—साथ ही इस विषय की जानकार हों। उस समय भय-
युक्त बात भूलकर भी मुख से नहीं निकालना चाहिए। अधिक से
अधिक चार स्त्रियाँ तक प्रसव के समय सूतिका-गृह में रह सकती
हैं। क्यों कि इससे अधिक स्त्रियों के रहने से एक शोर-गुल होता
है दूसरे घर की वायु भी खराब हो जाती है।
इस समय वेदना दो तरह की होती है; एक तो प्रसव की
वेदना और दूसरी किसी अन्य कारण से। प्रसव वेदना के चिन्ह
ये हैं:—कोख में शिथिलता आ जाती है, हृदय बन्धन-रहित जान
पड़ने लगता है, दोनों जाँघों में पीड़ा होने लगती है, कमर या पीठ
के चारों ओर दर्द होती है, प्रसव द्वार से कफ के समान पानी
निकलने लगता है तथा बार बार मूत्र त्याग करने की इच्छा होती
है, पर मूत्र उतरता नहीं। इसके अतिरिक्त प्रसव वेदना रुक रुक
कर होती है। प्रसव वेदना पहले धीरे धीरे होती है और फिर कुछ