रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २४३
ऐसा चुना जाता है, जो घर मकान भर में सब कमरों से रद्दी और
खराब होता है । किन्तु ऐसा करना बहुत ही बुरा है । वाग्भट्टजी
ने लिखा है:—
प्राक्चैव नवमात्मास्तात् सूतिका गृहश्रामयेत् ।
देशे प्रशस्ते सम्भारै सम्पन्नं साधकेऽहनि ॥
अर्थात्—नवाँ महीना शुरू होते ही शुभ दिन देखकर अच्छे
स्थान में बने हुए स्थान को सूतिका-गृह चुनना चाहिये । उसमें
सारी आवश्यकीय वस्तुएँ मौजूद रहना जरूरी है । ऐसे ही मकान
में गर्भिणी स्त्री को प्रसव करना चाहिए ।
अब हम यह बतलाना चाहते हैं कि सूतिका-गृह कैसा होना
चाहिए । ऊपर कहा जा चुका है कि इस घर को साफ-सुथरा और
हवादार रहना बहुत जरूरी है । इसके सिवा यह घर कम से कम
८-९ हाथ लम्बा ओर ५-७ हाथ चौड़ा होना चाहिए । इस घर
में बहुत तेज हवा आने की आवश्यकता तो नहीं है पर मन्द मन्द
हवा अवश्य आनी चाहिए । घर में ठण्ड बिलकुल न होनी चाहिए
यदि जाड़े का दिन हो तो इस घर में बिना धुएँ की आग हरवक्त
दहकती रहनी चाहिए । सुबह-शाम कमरे के दरवाजों को बन्द कर
देना उचित है ; इससे कमरे में शीत का प्रवेश नहीं हो पाता। बाकी
समय में जाड़े का दिन होते हुए भी दरवाजों को खुला रक्खे ।
गर्मी के दिनों में दरवाजों को बराबर खुला रखना उचित है । वर्षा
में यदि घटा घिरी हुई हो तो इन्हें बन्द करके थोड़ा-सा खुला रहने