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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 252, कुल 440 में से

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पृष्ठ 252

२४२ असली कोकशास्त्र
प्रसवकाल
बच्चा पैदा होने के समय को प्रसवकाल कहते हैं। जिस घर
में बच्चा पैदा होता है, उसे 'प्रसूति गृह' या ग्रामीण भाषा में सौर
कहते हैं और जब बच्चा पैदा हो जाता है, तब उस गर्भिणी स्त्री
का नाम प्रसूता हो जाता है। इस प्रकरण में प्रसवकाल के
सम्बन्ध में कुछ लिखना आवश्यक है। क्योंकि इस समय स्त्रियों
का नया जन्म होता है। जरा भी गलती करने से इस समय अनेक
तरह के रोग, जैसे प्रसूत का दुःख, योनि का बाहर निकल कर
बढ़ आना आदि—हो जाते हैं। इस लिए जब देखे कि गर्भ के
दिन पूरे हो गये, तब किसी चतुर दाई को पहले ही से बुलाकर
घर में रख ले। यदि कोई दाई न मिले तो घर की स्त्रियों को ही
खूब सावधानी से इस काम को करने के लिए तैयार हो जाना
चाहिए।
पहले कहा जा चुका है कि गर्भ में बालक प्रायः नौ महीने के
लगभग रहता है। कभी नौ महीने में कुछ दिन पहले ही वह पैदा
हो जाता है, और कभी दस-पाँच दिन बाद । जब प्रसवकाल
निकट आ जाय, तब गर्भिणी का प्रसूतिका-गृह निश्चय कर लेना
चाहिए। वह घर पवनीक यानी हवादार हो तथा दुर्गन्ध-रहित
हो। प्रकाश भी उस घर में अच्छी तरह होना जरूरी है। उस
कमरे में सील भी न होनी चाहिए। आजकल सूतिका-गृह बहुधा