सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 251, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 251

१६ असली कोकशास्त्र २४१
गजपीपल, इनको बराबर बराबर लेकर बकरी के दूध में पीस छान
कर पीने से भी कष्ट दूर हो जाता है और गर्भ नष्ट नहीं होता ।
—:०:—
गर्भिणी की इच्छा पूर्ति
गर्भिणी स्त्री को कभी-कभी कुछ ऐसी चीज खाने की इच्छा
होती है, जिसे वह सुगमता से नहीं पाती । ऐसी दशा में उसकी
जिस चीज पर इच्छा हो, वह चीज उसे अवश्य खिला देनी
चाहिए । कितनो ही स्त्रियाँ मूर्खता के कारण अपनी इच्छा को
प्रकट नहीं करतीं और लज्जा के कारण उसे दबा बैठती हैं, किन्तु
यह बहुत बुरी बात है । इच्छा को रोकने से गर्भस्थ बालक पर
बड़ा ही बुरा असर पड़ता है । ऐसी स्त्रियों की सन्तान बहुत
असन्तोषी होती है । इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि
गर्भिणी स्त्री को दो हृदय होता है और जो इच्छा उत्पन्न होती है,
वह एक प्रकार से उसके भीतर की माँग होती है। इसी से गर्भिणी
स्त्री को दौहृदिनी कहा गया है ।
—०—