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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 250, कुल 440 में से

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२४० असली कोकशास्त्र
फूल और कमल की केशर को पानी में पीस, बकरी के दूध में पीना
उचित और लाभदायक है ।
सातवाँ महीना
सातवें महीने में यदि किसी तरह की पीड़ा हो तो कैथ की
गिरि, मूँगा की शाख, धान की खील और इन्द्र जौ को सम मात्रा
में लेकर दूध में पीस छानकर पीना चाहिए । अथवा कैथ वृक्ष के
फल की गिरी, सालम मिश्री, धान की खील और इन्द्र जौ को
बराबर बराबर लेकर जल में पीस, गाय के दूध में छानकर पीना
चाहिए। या पीपल की जड़, बड़ की जड़, जल भंगरा, सूर्यमुखी
की जड़ और साँठी की जड़ तथा लाल चन्दन को सम मात्रा में
लेकर बकरी के दूध में पीसकर उसी के दूध में पीना भी विशेष
लाभ पहुँचाता है ।
आठवाँ महीना
पदमाख, गजपीपल, कमल का फूल, कमलगट्टे की गिरी
और धनियाँ इन चीजों को सम मात्रा में लेकर पानी में पीस
डालना चाहिए । बाद उसे गाय के दूध में छानकर पीने से सब
तरह के उपद्रव शान्त हो जाते हैं ।
नवाँ महीना
रेंड़ की जड़, काकोली, पलासपापड़ा, इनको सम मात्रा में
ले कूट-छानकर जल के साथ पीने से तत्क्षण आराम हो जाता है ।
या सोंठ, ढाक के पत्ते, इलायची, बायविडंग, सफेद जीरा और