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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

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२३८ असली कोकशास्त्र
सेवन करे तो कभी भी गर्भ नष्ट न हो । यदि गर्भिणी की कोष्ठ
शुद्धि न रहती हो तो थोड़ा-सा शुद्ध किया हुआ रेंडी का तेल
( डाक्टरी दवाखानों में मिलता है ) चीनी मिले हुए दूध में मिला
कर कभी कभी पी लेना चाहिए । यह विरेचन बड़ा ही लाभदायक
है, इसी से गर्भिणी स्त्री के लिए भी लिखा जा रहा है । इसके
सिवा दूसरी विरेचन की दवा कभी नहीं खाना चाहिए । क्योंकि
गर्भिणी स्त्री के लिए वमन और विरेचन निषेध है किन्तु ऊपर की
दवा लेने में कोई हानि नहीं है। इस लिए इसका सेवन करके कोष्ठ-
शुद्धि करने में गर्भिणी स्त्री को किसी बात की चिन्ता नहीं करनी
चाहिए ।
अब इसके बाद हम यह बतलाना चाहते हैं कि यदि गर्भावस्था
में अन्यान्य उपद्रव खड़े हों तो उनके लिए क्या करना उचित है ।
पहला महीना
यदि पहले महीने में किसी प्रकार का कष्ट प्रतीत हो तो
नीलोफर, कमल ककड़ी, सिंघाड़ा और कसेरू को ठण्ढे पानी में
पीसकर गाय के दूध में पीना चाहिए । अथवा मँजीठ, लालचन्दन,
कूट और तगर को बराबर बराबर लेकर दूध में पीसकर दूध ही में
पीना चाहिए ।
दूसरा महीना
तगर, केसर, बेलगिरि और कपूर को समान मात्रा में लेकर
बकरी के दूध में पीसे और उसी के दूध में छानकर पीये । या