रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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यह है कि माता के पेट में बच्चा मल-मूत्र क्यों नहीं करता ? इसका
कारण यह है कि बच्चे का पोषण नाला द्वारा होता है । इसी के
द्वारा माता के शरीर का रक्त बच्चे के शरीर में पहुँचता है और
उसी से उसकी वृद्धि होती है । यह नाला बच्चे की नाभि में लगा
रहता है । अब यह बात सहज ही में समझी जा सकती है कि
मल-रहित होकर बना हुआ रक्त ही जब बच्चे के शरीर में जाता
है, तब मल-मूत्र तैयार ही कहाँ से हो सकता है ।
गर्भवती स्त्री जो काम करती है, बच्चे का भी वही काम अपने
आप होता जाता है । गर्भिणी के सोने पर पेट का बच्चा भी निद्रित
हो जाता है; उसके जागते ही बच्चा भी जाग पड़ता है । इसी
प्रकार माता के साँस में खींची हुई वायु से बच्चा साँस लेता और
माता के साँस छोड़ने पर वह भी साँस छोड़ देता है । कहने का
तात्पर्य यह कि जो-कुछ माता करती है, उसका प्रभाव बच्चे पर
किस प्रकार पड़ता है, इसका ज्ञान प्राप्त करके गर्भिणी को सदा-
सर्वदा सावधान रहना चाहिए ।
यदि गर्भिणी स्त्री प्रत्येक वस्तु की जानकारी रक्खे और हर
काम में सावधानी रक्खे तो किसी प्रकार का उपद्रव नहीं हो
सकता । सन्तान भी उत्तम, दीर्घायु और हृष्ट-पुष्ट हो सकती है
तथा उसका जीवन भी सुखमय बीत सकता है । मूर्खतापूर्ण कार्य
करने से ही गर्भस्राव और गर्भपात हो जाता है, मरी सन्तान पैदा
होती है तथा बच्चे निर्बल, रोगग्रस्त और अल्पायु होते हैं ।