रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २३३
चिन्तन करती रहे—ग्रहण को न देखे और न उसकी छाया ही
अपने ऊपर पड़ने दे। गर्मी-सर्दी से हमेशा बचकर रहना जरूरी
है। लाल रंग का वस्त्र नहीं पहनना चाहिए। उच्च विचार रखना,
प्रसन्नचित्त रहना, पवित्रता रखना, हृदय में सब पर दया और
प्रेम रखना, गर्भ के बच्चे पर बड़ा ही अच्छा प्रभाव डालता है।
इस लिए इनको गर्भिणी स्त्री कभी न त्यागे।
यहाँ पर दो तीन बातों का उल्लेख कर देना अनुचित न होगा।
यद्यपि वे कोई विशेष आवश्यक तो नहीं हैं, तथापि उनकी जानकारी
रखने से सम्भव है मनुष्य को समय समय पर कुछ सहायता ही
मिले। पहली बात तो यह है सातवें महीने में बच्चे का पैर ऊपर
और सिर नीचे क्यों हो जाता है। बात यह है कि छः महीने तक
तो उसके अंगों की रचना होती है। बाद मानसिक शक्तियों का
विकाश होता है। यह मानी हुई बात है कि भारी चीज हमेशा नीचे
की ओर रहती है। इस लिए बच्चे के सिर का नीचे की ओर रहना
स्वाभाविक है। ईश्वरीय लीला बड़ी विचित्र और रहस्यमय है,
इस लिए यह कहना कठिन है कि उक्त कार्य का केवल यही कारण
है। हाँ यह अवश्य कहा जा सकता है कि और और कारणों में
सम्भव है कि एक कारण यह भी हो। दूसरी बात यह है कि गर्भ
में बच्चे रोते क्यों नहीं ? विद्वानों का कथन है कि गर्भ में बच्चे
का मुख झिल्ली (जरायु) से ढका हुआ रहता है और कण्ठ-द्वार
भी कफ से घिरा रहता है, इसी से वह नहीं रोता। तीसरी बात