रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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बड़ा ही उपयोगी है । खासकर दूध का सेवन तो गर्भिणी को
अवश्य करना चाहिए। हाँ दूध की शुद्धता पर ध्यान रखना जरूरी
है। क्योंकि दूध खराब होने से लाभ के बदले हानि करेगा । बीमार
पशु का दूध भूलकर भी न पीना चाहिए । थोड़ा बहुत फलों का
प्रतिदिन सेवन करना इस समय के लिए अमृत-तुल्य है । हमेशा
मुख साफ रखना चाहिए । स्नान करते समय अंग-प्रत्यंग को खूब
अच्छी तरह से धोकर स्वच्छ कर देना उचित है । आजकल बहुधा
स्त्रियाँ एक-दो लोटे पानी से ही नहा-धो लेती हैं । यह बात बहुत
बुरी है। केवल शरीर भिगो देने का नाम स्नान नहीं है; बल्कि
स्नान का मतलब है, समूचे शरीर को मल-रहित करके शुद्ध कर
डालना । प्रचुर जल से मल-मल कर स्नान करना प्रत्येक मनुष्य के
लिए बड़ा ही लाभदायक है । इससे तन्दुरुस्ती में जल्द कोई खराबी
पैदा नहीं होती । गर्भवती के लिए प्रतिदिन थोड़ा परिश्रम अवश्य
करना चाहिए। गृहस्थी का काम-काज अपने अनुकूल देखकर करने
से परिश्रम हो जाता है। मिहनत करने से स्त्री का शरीर फुर्तीला
रहता है, भोजन ठीक से पच जाता है, नींद अच्छी तरह आती है
तथा प्रसव यानी बच्चा पैदा होते समय कम कष्ट होता है ।
सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण लगने पर गर्भिणी को चाहिए कि
ग्रहण शुरू होने से घण्टा दो घण्टा पहले ही किसी कोठरी में जा
बैठे और जब तक मोक्ष न हो जाय, एकान्त में बैठी उपदेशप्रद
पुस्तक या महात्मा पुरुषों की जीवनी अथवा इन्हीं विषयों का