रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २२६
जाता है कि जिसे देखने पर यह मालूम किया जा सकता है कि
यह मनुष्य जाति का बच्चा है । इस समय शरीर की अपेक्षा
मस्तक बड़ा होता है । हाथ-पैर ढूठे से रहते हैं, यानी उनमें हथेलों
और तलवे नहीं रहते । आँख, कान, नाक और मुख की जगह
सिर्फ काले दाग मालूम होते हैं । दूसरे महीने के अन्त में प्रायः
सारे अवयव ( अंग ) साफ दिखायी पड़ने लगते हैं । लम्बाई एक
इंच तक हो जाती है ।
तीसरे महीने में आँख की पलकों का आकार बन जाता है ।
बल्कि यों कहना चाहिए कि एक प्रकार से वे तैयार ही हो जाती
हैं । इस समय मुख बन्द रहता है । इसी महीने में स्त्री पुरुष में
भेद बतलाने वाले अंगों की रचना होती है । इस समय तक लंबाई
प्रायः ३।। इंच तक हो गयी रहती है । चौथे महीने में मस्तक
और कलेजे की अपेक्षा दूसरे अवयव अधिक बढ़ते हैं । इस महीने
में बच्चा कुछ कुछ हिलना भी शुरू कर देता है । साढ़े चार महीना
होते होते लम्बाई भी ५-६ इंच तक हो जाती है । पाँचवें महीने
से अन्त तक पुट्ठे वगैरह ठीक ठीक बन जाते हैं । इस समय तक
शरीर की अपेक्षा सिर ही बड़ा रहता है और उस पर कोमल सफेद
( चाँदी के रंग के ) बाल निकल आते हैं । लम्बाई ७-८ इंच तक
और वजन ६ से ८ औंस तक हो जाता है । छठे महीने में चमड़े
की दोनों परतें दिखायी पड़ने लगती हैं, किन्तु वे बहुत ही नाजुक
और रक्तवर्ण होती हैं । लम्बाई १० इंच और वजन लगभग ३।।