रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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पहले हृदय की रचना होती है। कोई कहता है कि बच्चे का पोषण
नाभि द्वारा होता है, इस लिए पहले नाभि बनती है। भारतीय
चिकित्सकों के आचार्य धन्वन्तरिजी का कहना है कि बालक के
अंग-प्रत्यंग एक साथ ही उत्पन्न होते हैं; किन्तु अधिक सूक्ष्म
होने के कारण लक्ष्य में आना कठिन है। समय पाकर वे यथाक्रम
प्रकट होते हैं। यदि विचार कर देखा जाय तो यही सिद्धान्त युक्ति-
संगत भी मालूम होता है। बड़ी खोज के बाद अर्वाचीन विद्वानों
ने भी इसी सिद्धान्त की पुष्टि की है। गर्भ स्थित होने के समय से
प्रायः नौ महीने में गर्भस्थ बालक की शारीरिक तथा मानसिक
शक्तियों तथा अवयवों की रचना हो चुकती है। इन नौ महीनों को
इस विषय के विद्वानों ने प्राकृतिक नियमानुसार दो भागों में विभक्त
किया है। पहले भाग में छः मास रक्खा है और दूसरे में तीन
मास। पहले भाग में बच्चे के प्रायः सारे शारीरिक अवयव बनते
हैं और दूसरे भाग में मानसिक शक्तियों का विकास होता है।
इस लिए पहले छः महीने में बच्चे की शारीरिक रचना में और
पिछले तीन महीने में उसकी मानसिक शक्तियों में माता अपनी
इच्छा के अनुसार परिवर्त्तन कर सकती है।
तीसरे सप्ताह में गर्भ का आकार बाजरे के दाने के बराबर
हो जाता है। महीना समाप्त होते-होते सिर तथा पैर का आकार
मालूम होने लगता है। लम्बाई भी उस समय चौथाई इञ्च तक
हो जाती है। डेढ़ महीना बीत जाने पर उसका आकार ऐसा हो