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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 236, कुल 440 में से

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पृष्ठ 236

२२६ असली कोकशास्त्र
लगाकर उखाड़ ले ) यदि सीधी एक जड़ निकले तो पुत्र और दो
जड़ निकलने पर कन्या जाने । किन्तु यदि वह जड़ ऊपर से ही
टूट जाय तो समझना चाहिए कि सन्तान पैदा होकर मर जायगी
या जियेगी भी तो बहुत ही कम दिनों तक । प्रसव वेदना के समय
इसकी जड़ कपड़े में लपेट कर स्त्री की कमर में बाँध देने से तत्क्षण
प्रसव हो जाता है, जरा भी देर नहीं लगती । किन्तु यह जड़ी
तभी बाँधनी चाहिए जब यह अच्छी तरह से मालूम हो जाय कि
अब प्रसव होने में कुछ ही समय की देर है ।
—:०:—
गर्भरक्षा के उपाय
गर्भरक्षा के उपाय बतलाने के पहले यह बतलाना आवश्यक
प्रतीत होता है कि बालक गर्भ में किस प्रकार रहता और क्रमशः
बढ़ता है । गर्भाधान से चार महीने तक गर्भाशय का मुख बन्द
रहता है । ज्यों ज्यों गर्भ बढ़ता जाता है, त्यों त्यों गर्भाशय भी
बढ़ता जाता है और अंडाकार होकर नीचे को खिसकता आता
है । छठे महीने गर्भाशय की नार बहुत छोटी और चिपटी होकर
फैल जाती है । आठवें महीने में बिलकुल चिपटी हो जाती है ।
कभी तो सातवें महीने से ही और कभी नव महीने से गर्भाशय का
मुख खुलने लगता है और बालक उत्पन्न होने के समय एकदम
खुल जाता है ।