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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 235, कुल 440 में से

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१५ असली कोकशास्त्र २२५
यदि गर्भवती स्त्री को राजा का दर्शन करने की इच्छा
निरन्तर हुआ करे तो समझना चाहिए कि महा भाग्यशाली और
धनी सन्तान पैदा होगी । भूषण तथा रेशमी वस्त्र धारण करने
की इच्छा होने पर सुन्दर और शौकीन तबीयत की सन्तान पैदा
होती है । देव-मन्दिरों में जाने, महात्माओं के दर्शन करने तथा
धार्मिक कथायें सुनने की इच्छा होने पर शान्त स्वभाव की और
धर्मपरायण सन्तान पैदा होती है । साँप, सिंह आदि हिंसक
जानवरों के देखने की इच्छा होने पर हिंसक सन्तान उत्पन्न होती
है। किन्तु इसमें कभी-कभी सन्देह भी रह जाता है, पर पाँचवें महीने
में गर्भवती की जो इच्छा होती है, उससे अच्छी-बुरी सन्तान
भलीभाँति जानी जाती है और वह जानकारी कभी भी झूठी नहीं
होती—सदा सत्य उतरती है । इसका कारण यह है कि इसी
पाँचवें महीने में गर्भस्थ सन्तान में जीव का प्रवेश होता है ।
पुत्र-कन्या पहचानने की एक और रीति है, इसकी सैकड़ों
बार परीक्षा ली गयी है, एक बार भी झूठी नहीं हुई । वह यह है
कि यदि किसी स्त्री के गर्भ का बालक जानना हो तो भँड़भाँड़
नाम की बूटी को सन्ध्या समय स्नान करा रक्षा लपेट शान्त-चित्त
हो कह आवे कि "हे प्रभो, मैं इसे कल यह जानने के लिए उखाडूंगा
कि अमुक स्त्री के गर्भ में पुत्र है या कन्या।" यह कहकर
चला आवे । दूसरे दिन स्नानादि से निवृत्त होकर जाय और उसे
उखाड़ ले । (उसके काँटे अधिक कड़े हों तो कई तह करके कपड़े