रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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महीने तक किसी प्रकार की फड़कन नहीं प्रतीत होती । भूख-
प्यास की अवस्था में गर्भ अधिक डोलता है ।
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गर्भस्थ पुत्र पुत्री का ज्ञान
पेट में बालक पहले ही महीने में गोल जान पड़ता है ।
दाहिनी आँख कुछ बड़ी सी दीखती है। गर्भ में लड़का रहने पर
दाहिनी जंघा भी मोटी और भारी मालूम होती है। उसमें कुछ
दर्द भी हुआ करती है। दाहिने स्तन में दूध पहले उतरता है, मुख
का रंग अच्छा रहता है। स्वप्न में पुल्लिंग वस्तुएँ ही दिखलायी
पड़ती हैं, यदि मनुष्य का स्वप्न भी होता है तो पुरुष का ही ।
यदि गर्भवती के दूध में जूँ अथवा चींटी डालने पर वे जीती रहें
और चलती फिरती नजर आवें तो समझना चाहिए कि पुत्र उत्पन्न
होगा और यदि मर जाय तो कन्या की उत्पत्ति होगी । लड़का
दाहिनी कोख में रहता है। गर्भ में लड़का रहने पर स्त्री जो-कुछ
भी कार्य करेगी, वह दाहिने अंग से ही प्रारम्भ करके। यदि चलेगी
तो पहिले दाहिना पैर उठेगा, उठेगी तो दाहिना हाथ टेक कर
इत्यादि ।
यदि पेट में कन्या होती है तो स्त्री का मस्तक भारी रहता है,
तथा स्तनों का दूध पतला होता है। गर्भिणी के मुख का रङ्ग पीला
रहता है। इसके सिवा पुत्र के लक्षणों के ठीक विपरीत सब लक्षण
दिखलायी पड़ते हैं ।