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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 233, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र २२३
ओर यदि दर्द न हो तो जान ले गर्भ कदापि नहीं है । इस पहचान
से बढ़कर कोई भी पहचान नहीं है ।
संयोग के बाद ही पुरुष से तृप्ति, गर्भाशय में भारीपन, थक-
वट, छाती का फड़कना, रोम खड़े हो जाना आदि मालूम
होता है ।
कितनी ही स्त्रियों को तो गर्भ रहने के २-४ दिन बाद ही कै होने
लगती है और कितनी को मासिक-धर्म टलने के बाद यह चिह्न
दिखलायी पड़ता है । किन्तु बहुत सी स्त्रियाँ गर्भ धारण करते हुए
भी इन दोनों बातों से बरी रहती हैं; उनके सिर्फ मुख में थूक
अधिक आता है । ढाई-तीन महीने का गर्भ हो जाने पर स्तनों का
आकार भी बढ़ने लगता है; किन्तु बहुत-सी स्त्रियों के स्तन में
चार-पाँच महीने तक कोई परिवर्त्तन ही नहीं होता । तीसरे महीने
से गर्भिणी का पेट भी बढ़ने लगता है और नाभि का गढ़ा धीरे-
धीरे भरने लगता है । छः महीने तक गर्भ नाभिके नीचे रहता है,
बाद सातवें महीने से वह ऊपर चढ़ने लगता है । कभी-कभी रोग
से भी पेट बढ़ जाता है । इसकी खास पहचान यह है कि गर्भ
से बढ़ने वाला पेट बीच में ऊपर को कुछ उठा हुआ रहता है और
रोग से बढ़ा हुआ पेट सर्वत्र समान रूप से बढ़ता है । चार-पाँच
महीना बीत जाने पर तो गर्भ की पहचान और भी अधिक स्पष्टता
से की जा सकती है । क्योंकि फिर तो पेट में बालक का फड़कना
मालूम होने लगता है । किन्तु कई स्त्रियों के पेट में छः सात