रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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गर्भ ज्ञान
गर्भ स्थिति हो गयी या नहीं, यह जानने के लिए पहला चिह्न
तो यह है कि जब गर्भ रह जाता है तब किसी किसी स्त्री का जी
दूसरे ही दिन मिचलाने लगता है, मुख का रंग बदल जाता है,
शरीर में भारीपन आ जाता है। सबसे अच्छी पहचान महीनेभर
में होती है। वह इस तरह कि यदि मासिकधर्म टल जाय, तब
समझ लेना चाहिए कि गर्भ रह गया। क्योंकि गर्भ स्थित हो जाने
पर ऋतुधर्म बन्द हो जाता है। किन्तु जिन स्त्रियों का मासिक-धर्म
अनियमित रूप से होता है उनके लिए यह लक्षण ठीक नहीं है।
गर्भ रहने पर स्वाभाविक ही भोजन में अरुचि हो जाती है, शरीर
में आलस्य आता है कोई काम करने को जी नहीं चाहता, पुरुष
की ओर से भी रुचि हट जाती है, उल्टी होने लगती है, झूठी
ओक भी आती है, लेटने के लिए इच्छा करती है, कमर के नीचे
सुस्ती अधिक आ जाती है, कभी-कभी सिर भी दुखने लगता
है। गर्भिणी को खट्टा तथा मीठी चीजें खाने के लिए बहुत
उत्सुक रहती है। दस्त खुलासा नहीं होता, नींद अच्छी तरह नहीं
आती, स्तनों के मुख छोटे हो जाते हैं और उन पर श्यामलता
छा जाती है। गर्भ के पहचानने की रीति एक यह भी है कि
थोड़ा सी शहद पानी में मिलाकर पी लेने पर यदि थोड़ी देर के बाद
टूँड़ी में कुछ दर्द होने लगे तो समझना चाहिए कि गर्भ अवश्य है