रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १२१
६—सफेद् घुँघची का कपड़छान किया हुआ चूर्ण दूध के
साथ सेवन करना भी वीर्य के लिए बड़ा गुणकारी है ।
७—मुलहठी का चूर्ण एक तोला घी मिलाकर शहद् में चाटे
और ऊपर से दूध पी लिया करे तो बड़ा ही लाभ हो ।
८—गोखरू, तालमखाना, सफेद् मुसरी, कौंच के बीज,
गंगेरण की छाल और सहदेई जड़ी की जड़, इन सब चीजों को
कूट-कपड़छान कर चूर्ण के बराबर की मिश्री मिला प्रतिदिन दूध के
साथ सेवन करना चाहिए ।
९—गरम दूध में घी डालकर प्रतिदिन सेवन करना भी बड़ा
ही बलवर्द्धक है ।
१०—सिम्बल की मुसली का रस ४ तोला लेकर उसमें एक
तोला मिश्री मिलाकर पी जाया करे । यह दवा सात दिन में ही
प्रभाव दिखलाती है ।
११—शतावर, गोखरू, डाभ की जड़, सिंघाड़ा, गंगेरण की
छाल, कौंच के बीज, इनको सम मात्रा में कूट-कपड़छान कर
बराबर की मिश्री मिला एक तोला चूर्ण रोज रात को फाँक कर
ऊपर से दूध पी लिया करे तो वीर्य पुष्ट हो और शरीर में ताकत
आवे ।
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