सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 230, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 230

२२० असली कोकशास्त्र
इन दवाइयों को एक एक तोला लेकर कल्क बनाकर उसमें पकते
समय ही डाल देना चाहिए । सौंफ, देवदारु, बालछड़, छालछरीला,
बच, लाल चन्दन, तगर, कूट, इलायची, अंशुमती, खरेटी, रासना,
असगन्ध, वायविडंग, स्याह मिच, पीलपर्णी, दालचीनी, पत्रज,
रेडी की जड़ का छिलका, सेंधा नमक और सोंठ । थोड़ी देर के
बाद अदरख का अर्क डाल देना चाहिए । जब पक जावे, तब उसे
उतार ले और स्वच्छ पात्र में छानकर रख दे । फिर इस तेल का
मर्दन करे । यह तेल इतने रोगों पर जादूकी तरह असर करता है—
जो कुबड़े हों, बौने हों, पंगुल हों, महावात रोग से भग्न हों
या विसर्प रोग से पिडित हों, उनके लिए यह तेल बड़ा लाभ-
दायक है । शरीर के संकुचित हो जाने में, सन्निपात में गठिया में,
हृदय शूल में, यह तेल तत्क्षण गुण दिखलाता है । गले के भीतर
होने वाले सब रोगों का यह तेल नाश करता है । वीर्य-हीनता,
नपुंसकता, चित्तभ्रम, इन्द्रिय निर्बलता, बुद्धिहीनता, मन्दाग्नि को
यह फौरन दूर कर देता है । वन्ध्यात्व को भी यह दूर करने में
समर्थ है । प्रमेह रोग, अंडवृद्धि रोग, पिल्ली रोग, समलवाय, मृगी,
कुष्ठ, दाह, ज्वर आदि रोगों को भी यह तेल नष्ट कर देता है ।
इस तेल को एक महीने तक पीने से वृद्ध मनुष्य भी यौवनत्व
प्राप्त कर सकता है । इस तेल को सूँघने, पीने और मालिश करने
में नित्य बर्त्तना चाहिये । यह शतावरी तेल स्त्री और पुरुष दोनों
के लिए लाभदायक है ।