रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २१६
आँवला। इन चारों चीजों को बराबर बराबर लेकर ईख के रस में
भावना दे। बाद धूप में सुखा कर उसी के बराबर मिश्री मिला
शहद में रात को चाटे और ऊपर से शुद्ध शुद्ध दूध पी ले। इससे
बल-वीर्य की वृद्धि होती है।
२—कौंच वृक्ष की जड़ दूध में पीसकर प्रति दिन सबेरे पीने
से भी पुरुष का शरीर बलवान हो जाता है और खूब वीर्य पैदा
हो जाता है।
३—कौंच वृक्ष की जड़, सफेद तिल, असगन्ध, विदारी कन्द,
सांठी चावल, इनको बराबर बराबर लेकर कूट डाले। बाद कपड़े
से छानकर प्रति दिन ६ माशे चूर्ण खाकर ऊपर से गरम दूध में
घी डालकर पी ले। इसका एक महीने तक सेवन करने से शरीर
में विचित्र परिवर्त्तन हो जाता है। हमेशा सेवन करे तो और
भी अच्छा हो।
४—सूखे आँवले का चूर्ण ईख के रस में भिगोकर छाया में
सुखा ले। इस प्रकार सात बार रस में भिगोकर सुखा ले। बाद
उसके बराबर शहद और मिश्री मिलाकर पका डाले और उसका
प्रति दिन सेवन करे। यह दवा स्त्री और पुरुष दोनों के लिए एक
समान गुणकारी है।
५—शतावरी तेल बनाने की रीति—हरी शतावर को कूट कर
२ सेर रस निकाल लेना चाहिए। बाद उसमें एक सेर तिल का
तेल और ४ सेर गोदुग्ध डालकर मन्दाग्नि से धीरे धीरे पकावे