रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
पृष्ठ 228, कुल 440 में से
संदर्भ में पढ़ें२१८ असली कोकशास्त्र
कुम्हड़े के मुरब्बे के साथ सेवन करने से सब तरह के प्रमेह नष्ट
हो जाते हैं ।
प्रदर या प्रमेह के रोगी को लाल मिर्च, खट्टी मीठी तथा
कड़वी चीजें बादी और गरिष्ट वस्तुएँ भूलकर भी न खानी चाहिएँ ।
मैथुन करना भी एकदम छोड़ देना उचित है । दवा का सेवन करते
समय पूर्णरीति से ब्रह्मचारी बन जाना उचित है । तभी यह रोग
दूर हो सकते हैं, अन्यथा दवा का सेवन करना व्यर्थ हो जाता है ।
सौ दवाओं से बढ़कर एक परहेज से रहना है ।
-:०:-
बल वीर्य बर्द्धकमहौषधि
इस प्रकरण में कुछ ऐसी औषधियाँ लिखी जायँगी, जिनसे
शरीर में काफी बल-वीर्य की वृद्धि हो सकती है । किन्तु ये दवायें
सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए हैं, जो दुराचार करके अधिक वीर्य क्षीण
कर चुके हैं । यों तो ये औषधियाँ सबके लिए लाभदायक हैं, पर
संयमी और हृष्ट पुरुष को इनके करने की आवश्यकता ही क्या
है ? संयमी पुरुष को तो जी-जान से बस एक ही दवा का सेवन
करना चाहिए, बस वही संयम । संयम से बढ़कर दूसरी दवा
संसार में कोई भी नहीं है ।
१—जिस मनुष्य का धातु कम हो गया हो । उसे इस दवा
का सेवन करना चाहिए—धाय के फूल, बड़ी हड़, बहेड़ा और