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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 227, कुल 440 में से

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पृष्ठ 227

असली कोकशास्त्र २१७
वातज प्रमेह
वसा प्रमेह—चर्बी के समान पेशाब होता है ।
मज्जा प्रमेह—मज्जा मिला हुआ पेशाब होता है ।
क्षौद्र प्रमेह—शहद के रंग का, मीठा, रूखा और कषैला
पेशाब होता है । यह पेशाब जहाँ गिरता है, वहाँ चींटियाँ और
मक्खियाँ आ जाती हैं ।
हस्ति प्रमेह—रुक रुक कर तारदार और हाथी के मद जैसा
पेशाब होता है । कभी कभी पेशाब रुक भी जाता है ।
──:०:──
प्रमेह नष्ट के उपाय
१—छः माशे महुआ वृक्ष की छाल को ४ दाने काली मिर्च
के साथ पानी में पीस छानकर पीने से सब प्रकार के प्रमेह नष्ट
होते हैं ।
२—आँवला, हड़, और बहेड़े का चूर्ण १ तोला, शहद मिला-
कर चाटने से पुराना प्रमेह नष्ट हो जाता है ।
३—शुद्ध लौह-भस्म, शहद के साथ चाटने से प्रमेह जाता
रहता है । मात्रा बलाबल देखकर निर्धारित करनी चाहिए ।
४—शुद्ध वङ्ग-भस्म दो रत्ती जाड़े के दिनों में तो किसी
साधारण गर्म चीज के साथ या केले के साथ और गर्मी के दिनों में