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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 221, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र २१३
जाना, देह का टूटना, शरीर में जलन होना, प्यास अधिक लगना,
मन्दाग्नि होना, अजीर्ण होना इसके चिह्न हैं ।
इसके लिए बहुत सी औषधियाँ वैद्यक ग्रन्थों में लिखी गई हैं,
फिर भी प्रसंगानुसार यहाँ कुछ औषधियों का लिख देना आवश्यक
जान पड़ता है ।
वात प्रदर के लिए यत्न—मुलहठी, जीरा, कमलगट्टा, काला
नमक, छः छः माशे लेकर काढ़ा बना ले, बाद ऊपर से शहद मिला
कर पी ले। इसके सेवन से वात प्रदर दूर हो जाता है ।
पित्त प्रदर के लिए यत्न—छः छः माशे मुलहठी और मिश्री
को चावल के पानी में पीसकर सबेरे ही पी लिया करे ।
सब तरह के प्रदर रोग की औषधि—सुपारी के फूल, पिस्ते के
फूल, मँजीठ, सिरयाली के बीज, ढाक वृक्ष की गोंद, इन सबको
चार चार माशे लेकर बूक डाले और उसे फाँक कर ऊपर से थोड़ा
सा पानी पी ले। इसके सेवन से सफेद, पीला, स्याह, दुर्गन्धयुक्त
सब तरह के प्रदर रोग जड़ से नष्ट हो जाते हैं । अथवा, १ तोला
फालसा वृक्ष की छाल, रात को पानी में भिगो दे । बर्तन मिट्टी का
और कोरा होना जरूरी है । सबेरे उस पानी में मिलाकर उपरोक्त
दवा को पी जाय । इस दवा को पन्द्रह दिन तक करे । या कसेला,
माजूफल, पुरानी सुपारी, धाय के फूल, गोंद और लोध, इन सबको
पाव पाव भर तथा मँजीठ ३ तोला मोचरस ३ तोला, मेदा लकड़ी
३ तोला, सोंठ ३ तोला, सबको कूट-छानकर सेर भर घी में भिगो