रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१२ असली कोकशास्त्र
होता है। इस रोग के ये लक्षण हैं,—प्रसवद्वार से पानी निकले,
( यह पानी कई तरह का होता है ) स्त्री के शरीर में पीड़ा रहे,
हड्फूटन हो और हर वक्त सुस्ती बनी रहे तो समझना चाहिए कि
प्रदर रोग है। प्रसव द्वार से निकलने वाला यह पानी झागदार
लसोड़ और चिकना होता है। यदि इसका रंग सफेद, पीला अथवा
नीला हो ! तो जानना चाहिए कि रोग साध्य है, किन्तु यदि रुधिर
बराबर निकले, किसी तरह भी न रुके, प्यास अधिक लगे, हमेशा
दाह बनी रहे, ज्वर हो, शरीर भी क्रमशः क्षीण होता जाय तो
असाध्य समझना चाहिए। इसका नाम भी असाध्य प्रदर है ।
यह रोग कई तरह का होता है—जैसे वात प्रदर, पित्त प्रदर,
कफ प्रदर, सन्निपात प्रदर, रक्त प्रदर और असाध्य प्रदर । यदि
शुष्क कर निकले और वह फेनयुक्त हो, उसके निकलने में हलकी
सी वेदना हो तथा मांस के पानी के समान हो तो वात प्रदर सम-
झना चाहिए। रक्त पीले रंग का, नीला, सफेद या लाली लिए हुए
गर्म तथा अधिक मात्रा में निकले, शरीर में दाह भी हो तो पित्त
प्रदर समझो। गांद की तरह लसदार रुधिर निकले और उसका
रंग पीला अथवा गुलाबी रंग का हो तो कफप्रदर जानो । शहद के
समान, घी के समान, मुर्दे की सी गन्धयुक्त रुधिर निकलना सन्नि-
पात प्रदर यानी त्रिदोषयुक्त प्रदर का लक्षण है । रक्त और पित्त
के विकार से उत्पन्न होने वाले को रक्त प्रदर कहते हैं। शरीर का
कृष होना, मूर्छा आना, भ्रम होना, आँखों के सामने अँधेरा छा