सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 219, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 219

असली कोकशास्त्र २११
प्रदर और प्रमेह
उत्तम और निरोग सन्तान पैदा करने के लिए माता-पिता का
रोग-रहित होना अत्यावश्यक है। इस लिए स्त्री-पुरुष को रोग से
दूर रहने के लिए पूरी चेष्टा करनी चाहिए। संयम से रहने वाले
मनुष्य को रोग नहीं घेरते। जो मनुष्य संयमी नहीं होता, उसीका
रोग पीछा करता है। यदि कभी कोई भूल हो जाय और रोग आ
घेरे तो तुरन्त ही उसके शमन का उपाय करना चाहिए और आगे
के लिए पूर्णरीति से सावधान हो जाना चाहिए। इस प्रकरण में
दो ऐसे रोगों की चर्चा की जायगी, जिन्हें बहुधा लोग छिपाते हैं
और जिसका फल यह होता है कि किसी न किसी दिन जीवन पर
ही आ बनती है। ये दोनों ही महा भयानक और नाशकारी रोग
हैं। उत्तम सन्तानोत्पत्ति के तो ये जानी दुश्मन ही हैं। एक का
नाम प्रदर और दूसरे का नाम प्रमेह है। दो रोग एक से ही हैं।
भेद केवल इतना ही है कि प्रदर रोग स्त्री को होता है और प्रमेह
पुरुष को। पहले प्रदर रोग का वर्णन किया जाता है।
प्रदर रोग निर्बलता से हुआ करता है। यह रोग केवल स्त्रियों
को ही होता है, पुरुषों को नहीं। अति मैथुन से, खट्टा, तीक्ष्ण
चीजों के अधिक सेवन से, दिन में सोने से, अजीर्ण से, चिन्ता से,
शोक से, चोट लगने से, मादक वस्तुओं के सेवन से, गर्भपात से,
गर्भस्राव से तथा अप्राकृतिक भोजन करने से यह रोग उत्पन्न