रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
पृष्ठ 207, कुल 440 में से
संदर्भ में पढ़ें२०४ असली कोकशास्त्र
वन्ध्या प्रकार और उसकी चिकित्सा
काकवन्ध्या मृतवत्सा गर्भस्त्राव्यस्तु याः स्त्रियः ।
आदि वन्ध्याश्च गीयन्ते दोषैरेभिर्नचान्यथा ॥
—बालतन्त्रम् ।
वन्ध्या चार प्रकार की होती हैं । काकवन्ध्या, मृतवत्सा,
गर्भस्त्रावी और आदिवन्ध्या या जन्मवन्ध्या ।
काकवन्ध्या उसे कहते हैं जिस स्त्री के एक सन्तान होकर
फिर गर्भ न रहे ।
मृतवत्सा वह है, जिसके बच्चे पैदा होकर मर जायँ—जियें
नहीं ।
गर्भस्त्रावी उस स्त्री को कहते हैं, जिस स्त्री के गर्भ स्थित हो-
हो कर नष्ट हो जायँ ।
आदिवन्ध्या, जो स्त्री कभी भी गर्भ धारण न करे ।
ये चारो वन्ध्यायँ ऊपर कही गयीं रक्त-पित्तादि दोषोंवाली
वन्ध्याओं से सर्वथा भिन्न प्रकार की हैं । इनके अतिरिक्त आठ
प्रकार की वन्ध्यायँ और होती हैं ।
त्रिपक्षी शुभ्रती सञ्ज्ञा त्रिमुखी व्याघ्रिणी बकी ।