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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 208, कुल 440 में से

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पृष्ठ 208

असली कोकशास्त्र २०५

द्वे जीरके श्वेतवचाकर्कौट्याश्च फलं समम् ॥
तण्डुलोदक संपिष्टं चेत्स्थिता सूर्य सम्मुखो ।
त्रिदिनं च पिबेन्नारी दुग्धभक्तं च भोजनम् ॥
त्रिपक्षी, शुभ्रती, सज्जा, त्रिमुखी, व्याघ्रिणी, बकी कमली और
व्यक्तिनी । ये आठ प्रकार की वन्ध्यायें और होती हैं । अब इनके
लक्षण अलग-अलग कहे जाते हैं । जो स्त्री तीन पक्ष में ऋतुमती
हो, उसे 'त्रिपक्षी वन्ध्या' कहते हैं । दोनों जीरे, खुरासानी वच,
ककोड़े का फूल इन चीजों को बराबर-बराबर लेकर चावल के
पानी में पीसकर सूर्य के सामने खड़ी हो तीन दिन प्रातःकाल
पीना चाहिए और दूध तथा चावल के अतिरिक्त दूसरी कोई भी
चीज खाना उचित नहीं है । ऐसा करने से अवश्य गर्भ रह जाता
है, इसमें किसी प्रकार का सन्देह नहीं है ।
शुभ्रती नाम की वन्ध्या का शरीर संकुचित-सा रहता है और
देह में विवर्णता रहती है । यह बन्