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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 206, कुल 440 में से

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पृष्ठ 206

असली कोकशास्त्र २०३
इन दोनों के प्रकोप से रज-स्राव का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है।
इसके लिए खट्टे, उष्ण तथा तीखे पदार्थों का यथाशक्ति सेवन
करना लाभदायक होता है।
११—प्रदर, गर्मी तथा सूजाक आदि रोगों के कारण भी
गर्भ की स्थिति में बाधा पड़ती है।
१२—गर्भ स्थिर न होने का कारण नपुंसकता भी है। जो
मनुष्य स्त्री के साथ रमण करने की इच्छा करे, लेकिन अपनी
निर्बलता के कारण इच्छा पूरी न कर सके या स्त्री के पास जाते
ही जिसका पतला वीर्य अपने आप ही निकल जाय, दम फूलने
लगे, उसे नपुंसक कहते हैं। भावप्रकाश में सात प्रकार की
नपुंसकता लिखी है।
क्लीवःस्यात्सुरता शक्तस्तद्भावः क्लैब्यमुच्यते ।
तच्च सप्तविधं प्रोक्तं निदानं तस्य कथ्यते ॥ भावप्रकाश
मन की निर्बलता के कारण उत्पन्न हुई नामर्दी को 'मानस
क्लैव्य' पित्त की अधिकता से पैदा हुई नामर्दी को 'पित्तज-क्लैव्य'
वीर्य की कमी के कारण होनेवाली नपुंसकता को 'वीर्य-क्षय जन्य-
क्लैव्य' बीमारी के कारण नामर्दी को 'रोग-जन्य क्लैव्य' वीर्य-
वाहक नसों के कट जाने के कारण पैदा हुई नामर्दी को 'शिरोच्छेद
जन्य क्लैव्य' वीर्य के रोकने से उत्पन्न होने वाली नामर्दी को
'शुक्रस्तम्भन-क्लैव्य' और जन्म से ही नामर्दी को 'सहज-क्लैव्य'
कहते हैं।