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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 205, कुल 440 में से

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पृष्ठ 205

१६८ असली कोकशास्त्र
अपना कर्त्तव्य छोड़ दोगी तो धर्मच्युत हो जाओगी। उसका फल
तुम्हारा विनाश होगा। क्योंकि धर्मशास्त्र में लिखा है—“धर्म एव
हतो हन्ति, धर्मोरक्षति रक्षितः” नाश किया हुआ धर्म, अपने
नाशक का नाश कर डालता है और रक्षा किया हुआ अपने रक्षक
की रक्षा करता है। इसकी सत्यता बड़े-बड़े धनिक घरानों में स्पष्ट
दिखायी दे रही है। पति पत्नी की कुछ भी परवाह नहीं करता।
वहाँ स्त्रियाँ केवल विलास की सामग्री बनी बैठी हैं, और सब काम
नौकरों द्वारा निकल जाता है। जब गृहपत्नी की रूपछटा कम हुई
तब वे हृदयरूप-सिंहासन से उतार दी जाती हैं और बाजारू
वेश्याओं के पास पहुँचते हैं। बस यही सुख उन्हें पत्नी से मिलता
था और सब सम्बन्ध तो नौकरों से था। तुम्हारा सम्बन्ध केवल
भोग-विलास के लिए नहीं हुआ प्रत्युत् पति-सेवा के लिए भी है।
इसी लिए तुम धर्मपत्नी सहायिका समझी जाती हो। जो स्त्री
पतिसेवा अपने आप करती है उसका पति उसे जीवनभर नहीं
छोड़ता। उसका प्रेम वृद्धा हो जाने पर भी वैसा ही अटल रहता
है जैसा युवावस्था में था।
२४—पत्नी को चाहिए कि पति के इष्ट-मित्रों के साथ मीठा
व्यवहार करे उनका नम्रतापूर्वक सम्मान करे। जिसे पति देखकर
प्रसन्न हो।
२५—सेवक के विषय में लोग कहते हैं—“हमें काम प्यारा है,
चाम प्यारा नहीं” इस जनश्रुति से स्पष्ट मालूम होता है कि चाम