रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६० असली कोकशास्त्र
विलगे ना विलगाय से, उलझन बड़ी बैर की, जो सुलझे ना सुल-
-झाय ते” । इस लिए पत्नी को प्रेम से ही वश में करना चाहिये,
बल से नहीं ।
पत्नी-कर्त्तव्य
अभिवादन शीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः ।
चत्वारि तस्य वर्द्धन्ते आयुर्विद्या यशोबलम् ॥
१—स्त्री का कर्त्तव्य है कि वह अपने से बड़े माता, पिता,
सास श्वसुर और पति को नित्य प्रति प्रातः और सायंकाल, आदर
और श्रद्धापूर्वक प्रणाम करे । तथा उनकी तन मन से सेवा करे ।
इससे उसकी आयु, विद्या, यश और बल चारों की वृद्धि होगी ।
२—“पतिरेको गुरुः स्त्रीणाम्” स्त्रियों का पति ही एक गुरु
है । इस लिए गृहस्थ सम्बन्धी जो परामर्श करना हो वह पहले
पति से ही कर लेना चाहिये । उस परामर्श में जैसा निश्चय हो
वैसा करना उचित है । इससे लाभालाभ होने पर किसी को उल-
हना देने का अवसर नहीं मिलता ।
३—पत्नी को चाहिए कि वह पति के अतिरिक्त और किसी
से सन्तान की इच्छा न करे । देवी देवता या मियाँ मदार से जो
स्त्रियाँ सन्तान माँगती फिरती हैं वे पतिव्रता नहीं कही जा सकतीं ।