रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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है। इस लिए तुम भी मनोविनोद की सामग्री से सज-धज कर
पत्नी के पास जाओ। स्मरण रहे श्रृङ्गार करते समय किसी को
किसी के पास न रहना चाहिये। दोनों को अलग-अलग एकान्त में
वस्तु रचना करनी चाहिए। अन्यथा बाधा पड़ती है और सजी-
सजायी वस्तु के देखने में जो आकर्षण एवं प्रियता मालूम होती है,
वह सजते समय देख लेने से नहीं रहती। यह मनुष्य-स्वभाव है।
२८—स्त्री को उपहार में बड़ी-से-बड़ी और छोटी-से-छोटी
वस्तु भेंट दी जा सकती है। तुम यह न समझो कि छोटी-सी वस्तु
देने से स्त्री का मन क्या खुश होगा? वह इस छोटे उपहार को
पाकर भी आपके प्रेम का अनुभव करेगी। न होने से होना तो
अच्छा है। कहावत है—"मान का पान भी बहुत बड़ा होता है।"
२९—पतिव्रता स्त्री को पति-प्रेम चाहिये। यदि वह मिल
जाता है तो वह धन, वस्त्र, आभूषण आदि सब भूल जाता है।
उदाहरण में महरानी शैव्या और सती सीता को देखो—बनवास
की हालत में वे दोनों कैसी अवस्था में थीं। किन्तु उनका मन कभी
उदास नहीं हुआ। इस लिए सच्चा पति-प्रेम उत्पन्न करना पति का
कर्त्तव्य है। उसीके प्रेमभरे व्यवहार से उसकी उत्पत्ति होती है।
३०—कोई लोग बलपूर्वक कठोर शासन द्वारा स्त्री को वश में
रखना चाहते हैं। यह उनकी अज्ञता है। उनके वश में लाने का
सिर्फ एक उपाय सच्चा प्रेम और मीठा बचन है। कहा है—"वशी-
करण इक मन्त्र है, तज दे वचन कठोर" "प्रेमरस सान्यो कभी