रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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प्रगट कर दिया करे ।
२३—पति-पत्नी का कर्त्तव्य है कि धन जोड़-जोड़ कर रखने
की चेष्टा न करें, उसका सदुपयोग अर्थात् बच्चों के पढ़ने-पढ़ाने में
खर्च करें जिससे सन्तान सुयोग्य होकर सुख पा सके, और स्वयं
भी अपनी आवश्यकताओं को पूर्ण करते रहें । अच्छे कामों में खर्च
करना यह धन का सदुपयोग है । यदि बच्चे को मूर्ख रखकर धन
इकट्ठा करोगे तो वह नालायक रहकर सब धन नष्ट कर देगा ।
२४—कुछ रुपया स्त्री के पास रख छोड़ना चाहिए । प्रतिदिन
के खर्च के लिए पत्नी को तुमसे बार-बार न माँगना पड़े, इससे
बड़ी अंडस होती है और बुरा भी लगता है ।
२५—पति को पत्नी के कर्त्तव्य सदैव चिताते रहना चाहिए
और स्वयं भी अपने कर्त्तव्यों का ध्यान रखना चाहिए । जो इस
प्रकार विवेक से काम लेता रहेगा तो कभी मतभेद उत्पन्न नहीं
होगा और हमेशा प्रेमभाव बना रहेगा ।
२६—पत्नी की कही हुई बात को बड़े ध्यान से सुनना चाहिए
और फिर विचार कर जैसा उचित हो वैसा उत्तर या प्रबन्ध करना
चाहिए ।
२७—जिस प्रकार पत्नी वस्त्राभूषणों से सजाकर पति को प्रसन्न
करने के लिए उसके पास आती है वैसे ही पत्नी भी पति को स्वच्छ
वस्त्र और पुरुष के पहनने योग्य आभूषणों से तथा सुगन्धित पुष्प
इत्र फुलेल आदि द्रव्यों से सुवासित एवं सुसज्जित देखना चाहती