सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 193, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 193

१८६ असली कोकशास्त्र
समान वह भी अपनी इज्जत की रक्षा चाहती है । अपमानित होने
पर उसके हृदय में द्वेष उत्पन्न हो जाता है। सम्भव है क्रोधवश वह
भी तुम्हारा अपमान कर बैठे । मान सबको प्यारा है, अपमान नहीं ।
१६—पुत्रवती पत्नी को पति “बच्चे की माँ” कहकर पुकारने
लगते हैं। यह उनकी भूल है ऐसा उन्हें न करना चाहिए क्योंकि
यह रूखा सम्बोधन है। वह ऐसा शुष्क सम्बोधन पति मुख से
सुनना नहीं चाहती । सच तो यह है कि अगर पत्नी ही पति को
“बच्चे के बाप” कहकर पुकारे तो कितना बुरा मालूम हो। जैसे
पति पत्नी के मुँह से प्राणनाथ ! प्राणवल्लभ आदि प्रिय सम्बोधन
सुनना पसन्द करता है, वैसे ही पत्नी भी पति के मुख से प्राण-
प्यारी प्राणवल्लभे आदि मधुर सम्बोधन सुनना चाहती है ।
१७—जैसे आप अपने इष्ट-मित्रों में बैठकर वार्तालाप का
आनन्द मनाया करते हैं वैसे ही स्त्रियाँ भी अपनी सखी सहेलियों
में बैठकर विनोद किया करती हैं उनके इस कार्य को देखकर पुरुष
बुरा मानकर जली-कटी सुना डालते हैं। उनका यह व्यवहार युक्त
नहीं होता । स्त्रियों का मनोविनोद भी अपने ही समान समझना
चाहिए। अन्यथा वे कैसे मन बहलायेंगी। समान सखियों में
मनोविनोद करने से उनका स्वास्थ्य बनता है ।
१८—धार्मिक उत्सवों में स्त्रियों को साथ ले जाना चाहिए।
इससे उनकी योग्यता बढ़ती है। कथा-वार्त्ता सुनने से वे व्यवहार
कुशला हो जाती हैं।