रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १८४
ग्राम्य या जंगली सपरिश्रम जीविका उपार्जन करनेवाली स्त्रियों को
ले लीजिए। उन्हें कोई भी शिकायत नहीं होती, रास्ते चलते किसी
आड़ में बच्चा जन लेती हैं। न उन्हें प्रसव वेदना होती है और न
धाय की आवश्यकता होती है। थोड़ी देर के बाद बच्चा उठाकर घर
जा पहुँचती हैं। परमात्मा ने सृष्टि के सभी नियम समान बनाये हैं,
हम अपनी गलती से हेर-फेर कर दुःख उठाते हैं। समस्त संसार
के जीवों को ले लीजिये उनको गभ धारणासे लेकर गर्भ मोचन तक
किसी की सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ती। न उनके पास
धाय, न सेविका, न डाक्टर-वैद्य, सदैव समान परिश्रम करते हुए
निरोग अपनी जाति के अनुसार बल पुरुषार्थ उनमें पाया जाता है
ऐसा क्यों ? इसका स्पष्ट उत्तर यही हो सकता है कि वे सृष्टि-नियम
के अनुकूल आचार-विचार करते हैं इस लिए सुखी रहते हैं। मनुष्य
अपनी बुद्धि के अभिमान में प्रकृति विरुद्ध काम करता है और
दुःख उठाता है।
१४—पति को चाहिए पत्नी के स्वच्छ वायु सेवन का प्रबन्ध
करे अर्थात् प्रातः सायं दोनों समय भ्रमणार्थ जहाँ की वायु अच्छी
हो वहाँ ले जाय। इससे मन बहलता है और स्वास्थ्य वृद्धि होती
है। वायु सेवन करनेवाली नारियों को देखा होगा वे कैसी स्वस्थ
होती हैं।
१५—यदि पत्नी से कोई अपराध हो जाय तो उसे प्रेम से
समझा दो, उसकी सखियों में उसे अपमानित मत करो। तुम्हारे