रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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हैं, पति मुझमें इन गुणों की कमी देखकर उसकी प्रशंसा दिखाकर
मेरी निन्दा कर रहा है। यह स्वाभाविक ही है क्योंकि पुरुष भी
अपनी स्त्री के मुख से पर-पुरुष-स्तुति सुनना नहीं चाहता । वह
भी इसमें अपनी बेइज्जती का ही अनुभव करता है और कभी-कभी
इसका ऐसा परिणाम निकलता है कि स्त्री समझती है क्या कारण
जो पति पर-स्त्री की प्रशंसा कर रहे हैं सम्भव है इनका मन उसपर
आ गया हो और ये उससे फँस गये हों या फँसने की इच्छा रखते
हों अन्यथा इन्हें उसकी प्रशंसा की क्या आवश्यकता थी ? पुरुष
भी अपनी स्त्री के मुख से पर-पुरुष-स्तुति सुनकर मन में सन्देह
करने लगता है कि इसमें अवश्य दाल में काला है । इससे नतीजा
यही साफ निकलता है कि स्त्री-पुरुष दोनों ही इस बात को निन्दनीय
समझते हैं। इस लिए इस हानिप्रद कार्य को दोनों में से किसी को
भी न करना चाहिये ।
९—स्त्री अपनी प्रशंसा पति के मुखसे सुनना चाहती है। पति
को चाहिए, पत्नी के बनाये भोजन पक्वान्न आदि की प्रशंसा करे।
जिससे उसका उत्साह बढ़े और वह भविष्य में उत्तमोत्तम पदार्थ
बनाने की चेष्टा करे और प्रशंसा लाभ करने की इच्छा करे । जब
कभी पत्नी नये ढंग के मन लुभानेवाले शृंगार और वस्त्र धारण
करे तब उसकी खूब बड़ाई करनी चाहिये । क्योंकि वह पति से
मान पाने के लिए ही केशविन्यास आदि विविध रचना करती है ।
पति से मान पाकर उसकी अन्तरात्मा फूल उठती है और वह सम-