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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 185, कुल 440 में से

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पृष्ठ 185

१८० असली कोकशास्त्र
पति के कर्त्तव्य
१—पति का सबसे पहला कर्त्तव्य है कि वह पत्नी को अपना
सच्चा मित्र तथा सहायक समझता हुआ उसके साथ अपने समान
बर्त्ताव करे। उसने कभी छल-कपट युक्त व्यवहार न करे। अपने
हृदय से उसका सच्चा सत्कार करता हुआ प्रेमपूर्वक बर्त्तें।
२—स्त्री चाहे सरूपा हो या विरूपा, उसे त्याग कर दूसरी से
सम्बन्ध न करे। जैसे कहा है—"एका भार्य्या सुन्दरी वा दरी वा"
उसी में सन्तुष्ट रहे और सुख-स्वर्ग सममे। वह यथार्थ ही सुखी
हो जायगा।
३—पुरुष की सच्चरित्रता, दुश्चरित्रा स्त्री को भी सच्चरित्रा
बना लेती है। कहा है—"शस्त्रं शास्त्रं वीणा वाणी नरश्चनारी
पुरुष विशेषं प्राप्य योग्यायोग्या भवन्ति" ये उपरोक्त वस्तुएँ जैसे
पुरुष को प्राप्त होती हैं वैसी ही हो जाती हैं। इस लिए पुरुष
का सच्चरित्र होना परम आवश्यक है।
४—स्त्रियें प्रायः अपने पंत को साफ-सुथरा देखना पसन्द
करती हैं। इस लिये पुरुष को चाहिए कि वह यदि अपने लिये
स्वच्छ वस्त्र या स्वच्छता न रखता हो तो अपनी स्त्री के लिये
अवश्य पवित्र रहे और स्वच्छ वस्त्र धारण करे। जैसे स्त्री की
मलीनता उसे पसन्द नहीं, वैसे ही पति की गन्दगी पत्नि को
भी नहीं भाती।